वन समन्दर और धरती को,तुम छेड़ रहे हो प्रकृति को।वन काट बंजर किया और नदियों का धारा मोड़ दिया,जरा सोच तेरा क्या होगा मानव, जिस दिन प्रकृति तुमको छेड़ दिया।।
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शिक्षक दिवस पर शायरी।
विधार्थियों से मैं कहता हूँ, शिक्षकों का सम्मान करें। है शिक्षकों से अनुरोध मेरा, विधार्थियों का चरित्र निर्माण करें।
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मानवता की राह छोड़, हिंसा का रूख अपनाया है। मंदिर-मस्जिद भी महफूज़ नहीं,हर जगह मौत साया है। राक्षस हीं आतंकवादी बनकर,कलयुग में धरा पर आया ह...
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Hindi poem on friendship नंगे पांव और ज्येष्ठ दुपहरी,संग जिसके शीतल लगती थी। दोस्त मेरा सब हीरा था,हर रिश्ता पीतल लगती थी। वो दोस्त ...

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