उसे गुरूर था अपने हुस्न पर उतरता चला गया,
मुझे जैसे-जैसे वो अपनी आँँखों में डुबाती गई,
वैसे-वैसे मैं उसके आँखों से उभरता चला गया,
वो समझ बैठी कि मेरी मंजिल हैं वो,
लेकिन मैं उससे होकर भी गुजरता चला गया।
दर्द पुराना हवा पुरवाई का दुश्मन है,
दिल दीवाना किसी हरजाई का दुश्मन है।
मेरा प्यार किसी की बेवफाई का दुश्मन है,
दिन तो कट जाता है मगर,ये रात तन्हाई का दुश्मन है।।